Sunday, 2 March 2008

भारतीय क्रिकेट का एक सुनहरा दिन

२ मार्च २००८ का दिन भारतीय क्रिकेट के लिए एक यादगार दिन बन गया. एक तरफ़ इस दिन भारत ने आस्ट्रेलिया में विश्व चैम्पियन आस्ट्रेलिया को हराया वहीं दूसरी तरफ़ भारतीय जूनियर टीम ने अंडर-१९ का विश्व कप जीता.
इस दिन भारत ने आस्ट्रेलिया में खेली जा रही सीबी सिरीज का पहला फाइनल 6 विकेट से जीत लिया । भारत ने जीत के लिए जरूरी २४० रन महज ४५.५ ओवर में ४ विकेट पर २४२ रन बनाकर हासिल कर लिए। इस जीत के नायक रहे मॉस्टर ब्लॉस्टर सचिन तेंडुलकर जिन्होनें मात्र १२० गेंदों पर ११७ रण बनाये और अंत तक आउट नहीं हुए । उन्होंने ऑस्ट्रेलिया की धरती पर ODI मैचों में अपना पहला और अपने कैरियर का ४२ वां शतक ठोका। इसके साथ सचिन पिछले १३ महीने से वन डे में चल रहे नर्वस नाइंटी के मिथक से भी बाहर निकल आए।

सचिन को ४१ से ४२ शतक का सफर तय करने में १३ माह लंबा समय लगा। इस दौरान वे छह बार शतक के करीब जाकर नर्वस नाइंटी के शिकार बने।

अंडर-१९ का विश्वकप:

आज ही के दिन दूसरी तरफ़ मलयेशिया कुआलालंपुर में भारतीय टीम ने दूसरी बार अंडर-१९ का विश्वकप जीत कर इतिहास बनाया. इस तरह २ मार्च २००८ भारतीय खेल जगत के लिए सुपर संडे साबित हुआ.

भारत ने आज यहां खेले गए वर्षा से बाधित एक रोचक फाइनल में दक्षिण अफ्रीका को १२ रन से मात दी। अफ्रीका को जीत के लिए २५ ओवरों में ११६ रनों का लक्ष्य मिला था। लेकिन वह ८ विकेट खोकर सिर्फ १०३ रन ही बना सकी।

हालांकि भारत के 160 रनों के सामान्य लक्ष्य के सामने अफ्रीका की टीम कभी भी सहज नहीं नजर आई। उसने अपने तीन विकेट महज 11 रन और 7.4 ओवरों में ही खो दिए थे। वर्षा आ जाने के कारण जब फिर से खेल प्रारंभ हुआ तो अफ्रीका की राह और मुश्किल हो गई। उसे 25 ओवरों 116 रनों का लक्ष्य मिला।

Bhartiya kriket ka ek sunehara दिन

दंभी विश्व चैंपियन ऑस्ट्रेलियाई खिलाड़ियों को क्रिकेट का पाठ पढ़ाते हुए भारत ने सीबी सिरीज का पहला फाइनल 6 विकेट से जीत लिया है। भारत ने जीत के लिए जरूरी 240 रन महज 45.5 ओवर में 4 विकेट प 242 रन बनाकर हासिल कर लिए। इस जीत के नायक मॉस्टर ब्लॉस्टर सचिन तेंडुलकर रहे। उन्होंने ऑस्ट्रेलिया की धरती में पहला और अपने कैरियर का 42 वां शतक ठोका। इसके साथ सचिन पिछले 13 महीने से वन डे में चल रहे नर्वस नाइंटी के मिथक से भी बाहर निकल आए। सचिन निर्विवाद रूप से मैच के सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी थे,उन्हें ही प्लेयर ऑफ द मैच चुना गया।
सचिन ने अपने 19 साल लंबे कैरियर की संभवत: सबसे यादगार पारियों में से एक खेलते हुए भारत को जीत के मुहाने पर पहुंचाया। यह उनके कैरियर का 42 वां शतक है। लेकिन उन्हें 41 से 42 का सफर तय करने में 13 माह लंबा समय लगा। इस दौरान वे छह बार शतक के करीब जाकर नर्वस नाइंटी के शिकार बने। उन्होंने अपना अंतिम टेस्ट शतक(100*) वेस्टइंडीज के खिलाफ 31 जनवरी 2007 को बनाया था।
भारत ने रोहित शर्मा ने अपने वन डे कैरियर की सबसे यादगार पारी खेलते हुए 66 रन बनाए। इस दौरान उन्होंने शतकवीर सचिन के साथ 123 रनों की निर्णायक भागीदारी निभाई। सचिन ने एक अर्से बाद अपना शतक पूरा किया।