Saturday, 17 November 2007

जिस राह से गुजरें तू!

जिस राह से गुजरे तू, उसपर ऐसे पद चिह्न छोड़ दें !
सफर बनें आसान, राही को उसकी मंजिल दिखला दें!!

जिस बाधा से निपटें तू, उसका ऐसा भेद खोल दें !
बाधा बन जाये सुविधा, सब के किये उसे खेल बना दें!

जिस पथ पर कांटे चुभे तुझे, उस पथ पर ऐसे फूल खिला दें!
महक उठे पथ, कोमल क़दमों को शीतल अहसास करा दें!

जिस दिक्कत से तेरा सामना हो, उसका ऐसा हल ढूंढ दें!
प्रश्न को मिले उत्तर, कठिनाई को अवसर बना दें!!